Friday, October 8, 2010

बारिश से हुई तबाही

बारिश ने उत्तराखंड के गाँवों में जो भीषण तबाही मचाई है उससे उबरने में यहाँ के लोगों को पता नहीं कितना समय लगेगा क्योंकि जिस तरह से जान माल का नुकसान हुआ उसका अनुमान तक लगा पाना नामुमकिन है।

मुझे नैनीताल से लगभग 16-17 किमी. दूर छड़ा गांव की कुछ तस्वीरें मिली हैं जो कि अकेले इसी गांव की तबाही का नजारा पेश कर रही हैं। दूर गांवों की दशा तो इससे भी कहीं ज्यादा दिन दुःखाने वाली हैं।

फोटो - के. एस. सजवान











11 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही भयावह नजारा है, बाढ से काफ़ी क्षति हुई है, आशा है सरकार समुचित प्रबंध कर रही होगी.

रामराम.

Pratik Maheshwari said...

बहुत ही दुखद बात है.. पर प्रकृति के कहर को कोई नहीं रोक सकता है.. बस एक ही काम किया जा सकता है.. ज़ख्म पर मरहम लगाने का..
आशा है कि वहाँ का प्रशासन जल्द ही उनके लिए उचित प्रबंध ज़रूर करेगा...

P.N. Subramanian said...

प्रकृति का यह प्रकोप तो भयानक है. गरीब जनता ही झेलेगी.

Manish Kumar said...

आशा है जल्द ही सड़कों और क्षतिग्रस्त मकानों को अपने पुराने स्वरूप मैं लौटाया जा पाएगा।

Abhishek Mishra said...

Vakai dukhad sthiti hai.

नीरज जाट जी said...

सातवें चित्र में तो कार का कंकाल निकला है।
बहुत भयानक।

sunita said...

प्रकृति के आगे बेबस हम ,,,,
बहुत ही दुखदायी

स्वप्नदर्शी said...

इसी तरह इस बार पहाड़ को देखना हुआ और देखना रह भी गया. प्रकृति की आपदा से अलग इसे लम्बे समय से चल रहे नीतिगत फैलियोर की तरह भी देखना होगा, जिसमे २०० सालों से चल रहे जंगलों के कटान की भी मुख्य भूमिका है, छोटे बड़े बाँध का जो जाल उत्तराखंड में बुना जा रहा है, वों स्थितियों को और भयंकर आने वाले समय में बनाएगा. प्रकृति से ज्यादा, इसे गुलाम और आज़ाद भारत की नीतियों के परिणाम की तरह देखना चाहिए.

विनीता यशस्वी said...

Swapndarshi ji : mai apki bato se puri tarah sahmat hu...

abcd said...

i have suggestion to prevent deforestation....number of trees planted should be attached with the -rebate in tax on income of a person !!may be 1% rebae on ,say,50 trees planted ...or something like that.

what say?

कलयुग तो है ही--चिल्लाते रहेन्गे कि पेड मत काटो या पेड लगओ तो ,नही होने वाला/

so lets attach a benefit to this serious problem.

its my serious suggestion.

मुनीश ( munish ) said...

Horrible indeed ! When will administration wake up ?