Tuesday, July 14, 2009

मेरे गांव की कुछ तस्वीरें

आज मैं एक मित्र के अनुरोध पर अपने गांव की कुछ तस्वीरें लगा रही हूं। मेरा गांव नैनीताल से 22 किमी. दूर भीमताल के पास पड़ता है।

मेरे गांव को जाने वाली सड़क


मेरे गांव के रास्ते में पड़ने वाले छोटे-छोटे गांव

मेरे गांव के रास्ते में पड़ने वाले छोटे-छोटे गांव

ये है मेरा गांव

मेरे घर से रात को 11.30 पर चांद का नज़ारा

मेरे घर के सामने का नज़ारा

मेरे घर में बनाया बार्न स्वैलो चिड़िया का घर
ये चिड़िया मिट्टी को पानी में गीला करके अपना घर बनाती है। इसे स्थानीय भाषा में गोंतियाली कहते हैं।


बार्न स्वैलो

मानसून में मेरे गांव का नज़ारा




47 comments:

श्यामल सुमन said...

खूबसूरत तस्वीरों के माध्यम से एक बेहतर प्रस्तुति।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

अनिल कान्त said...

बहुत सुन्दर और प्यारा गाँव है आपका ...तसवीरें देखकर ही वहाँ जाने का मन हो आया

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

समयचक्र said...

गाँवो की फोटो बहुत बढ़िया लगी. आनंद आ गया भाई तस्वीर देखकर .बधाई

अमिताभ मीत said...

Beautiful photographs.

प्रेमलता पांडे said...

attractive!

clay-nest!!!

Udan Tashtari said...

बड़ा खूबसूरत और आलौकिक नजारा है आपके गांव का!

Ashok Pandey said...

विनीता जी, बहुत सुंदर है आपका गांव। चारों ओर हरियाली का अनंत विस्‍तार मन मोह लेता है।

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत खूबसूरत है,जैसा गाँव होना चाहिए-शांत नीरवता लिए हुए.फिर पहाड़ी गाँव तो मनमोहक होते भी हैं.मेरी एक मित्र भी भीमताल के पास ही ,यहीं-कहीं की रहने वाली थी ,१९९८ के बाद ,आज-कल कहाँ हैं पता नहीं .आपके भीमताल के पास गाँव के चित्र नें बहुत सारी भूली-बिसरी यादों की सुधि दिला दी .

सुशील छौक्कर said...

फोटो देखकर गाँव आने को जी ललचाने लगा।

Vinay said...

बहुत विहंगम दृश्य हैं
---
विज्ञान । HASH OUT SCIENCE

विजय गौड़ said...

गांव को जाने वाली सडक भी दिखी, रास्ते में पडने वाले गांव भी और आपका गांव भी एक हद तक दिख ही गया। पर घर न दिखा जबकि घर से चांदनी रात का नजारा भी दिखा और घर के सामने के घर भी दिखे। कैसे आएंगे आने वाले।

अजय कुमार झा said...

भई विनीता जी..हमारा ओब्जेक्शन मीलार्ड ..नोट किया जाए..हमें यदि पता होता की इत्ता खूबसूरत है आपका गाँव तो हमें क्या फितूर आता जो हम यहाँ वहाँ भात्काकते..आप अकेली चली गयी..गलत बात है ...वैसे सच कहूँ तो ठीक ही किया..बता देती तो पता नहीं ..कित्ते लटक लेते..और बस हो जाता एक ब्लॉगर सम्मलेन..हा ..हा..हा..
सच कहूँ तो स्वर्ग है आपका गाँव..भाग्यशाली हैं आप..

मुनीश ( munish ) said...

lovely countryside ! very picturesque ! thanks to that friend who inspired u to post these pictures.

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर लगी यह तस्वीरें, वेसे आज से २२ साल पहले हम नेनीताल ओर फ़िर भीम ताल ,राम गढ यनि इस इलाके का पुरा चक्कर लगा कर आये थे,
धन्यवाद

Dr. Ashok Kumar Mishra said...

nice picture

मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-शिवभक्ति और आस्था का प्रवाह है कांवड़ यात्रा-समय हो तो पढ़ें और कमेंट भी दें-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

mehek said...

behad khubsurat tasverien

M VERMA said...

बहुत खूबसूरत है आपका गाव तो

Unknown said...

Photo dekhe ke to lag raha hai ki apke gaav jana hi hoga kuki itna sunder gaav jo hai apka.

नितिन | Nitin Vyas said...

सुन्दर तस्वीरें!!

पंकज सुबीर said...

स्‍वर्ग यदि कहीं है जमीन पर तो शायद यहीं है ।

मुनीश ( munish ) said...

कोलाहल से कोसों दूर एक सुरम्य वादी में न सिर्फ आपका गाँव मौजूद है , आपका ये ब्लॉग भी शेष ब्लोगिस्तान पे छाई चिख़-चिख़ -झिक-झिक से परे है ....परम शान्ति ,हरी ओउम तत्-सत् ...महानिर्वाण !

ताऊ रामपुरिया said...

बस मंत्रमुग्ध हो गये आपके गांव के नजारे देखकर. जिसने भी आपसे फ़रमाईश की उस शख्स को लाखों को धन्यवाद.

रामराम.

Anil Pusadkar said...

ऐसे गांव मे तो बस जाने का दिल करता है।

मिहिरभोज said...

हुह ये कोई गांव है...न इसमें गंदी नालियां है ...न ही फैक्टरी का धुंआ दिखाई देता है न बदबूदार कचरे के ढेर ...गांव तो मेरा है जहां ये सब है....

निशाचर said...

अत्यंत सुन्दर....... आप धरती पर रहने वाले चुनिन्दा भाग्यशाली लोगों में से हैं जिन्होंने ऐसी स्वर्ग के समान सुन्दर धरा (अगर स्वर्ग ऐसा ही होता है तो) पर जन्म लिया. हो सके तो कुछ और तसवीरें लगायें..........मन अभी भरा नहीं..

अभिषेक मिश्र said...

Vakai bahut hi sundar hai aapka gaaon. Tasviron ne bhi man moh liya.

Dipti said...

बहुत ही सुन्दर

Unknown said...

Bahut sunder gaav aur us se bhi zyada sundar nazare.

Unknown said...

सही में बहुत खूबसूरत है आपका गाँव, और उस तक पहुँचने तक का रास्ता भी .....
हम भी आना चाहते हैं आपके सुन्दर गाँव

Ashish Khandelwal said...

पहाड़ी गांव में घूमने की बहुत पुरानी हसरत है। मेरे एक मित्र का ननिहाल है रानीखेत के पास। चाहकर भी वहां जाने का कार्यक्रम नहीं बन पाता। आपके गांव की इन सुंदर तस्वीरों ने इस हसरत को औऱ बढ़ा दिया है.. आभार

विवेक सिंह said...

आपके गाँव को जानेवाला रास्ता तो बड़ा कठिन है बाकी तो अति सुन्दरम है !

Batangad said...

शांत, सुंदर, मोहक, प्रकृति

जितेन्द़ भगत said...

खुशनसीब हैं आप जो इतनी सुंदर जगह रहती हैं।

Priyankar said...

बेहद सुंदर गांव और आकर्षक तस्वीरें . प्रकृति पर आदमी का ’एन्क्रोचमेंट’ बहुत कम है . प्रकृति की छाया में रहना कितना सुखद है .

रंजू भाटिया said...

बहुत सुन्दर है यह तो .यहाँ से वापस कौन आना चाहेगा :)

rachana said...

खूबसूरत!!

महामंत्री - तस्लीम said...

Bahut shaandar hai aapka gaaun.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

डॉ .अनुराग said...

ये चाँद मुआ भी आपके ही गाँव का है ?

BrijmohanShrivastava said...

पढ़ा ,तस्वीरें देखीं ,अच्छा लगा

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

सचमुच बहुत सुन्दर गांव है.

Unknown said...

khubsuraj hai ganv ka najara

आप मेरे ब्लोग पर नजर इनायत करे
image photography:आज बादलो ने मचाया शोर .

के सी वर्मा said...

achchha parytn kiya hai aap ne !unlogon ke dimag se yh nikal gaya ki gaon bilkul bekar hote hain ? sadhuwad meri taraf se

Harshvardhan said...

nice picture vineeta ji........

निर्मला कपिला said...

विनीता अब तो मेरा मन उतावला हो गया है तुम्हारे गाँव आने के लिये तो बताओ कब आऊँ बहुत सुन्दर तस्वीरें हैं बधाई

Manish Kumar said...

वाह ये चिड़िया इस तरह घोसला बनाती है ये आज ही पता चला। आप के गाँव की तरफ के अधिकतर घर पक्के हैं ये देखकर खुशी हुई।

hem pandey said...

पहाड़ की याद ताजा हो गयी.

नीरज मुसाफ़िर said...

विनीता जी,
कुछ दिन पहले आपने मेरी भीमताल वाली पोस्ट पढ़कर कहा था कि अपने शहर की तस्वीरें देखकर अच्छा लगा. फिर मैंने सोचा कि आपका शहर तो नैनीताल है, फिर आप भीमताल को क्यों अपना शहर बता रही हैं.
अब समझ में आया कि आपने भीमताल को अपना शहर क्यों बताया था. उस बडबोलेपन के लिए माफ़ी मांगता हूँ.
वैसे आपने इस गाँव का नाम क्या है? हमारा क्या है. घूमते फिरते रहते हैं. चले जायेंगे किसी दिन.