Friday, January 22, 2010

रानीबाग की कुछ तस्वीरें इस पोस्ट में

पिछली पोस्ट में मैंने रानीबाग में लगने वाले उत्तरायणी मेले के बारे में लिखा था पर कुछ समस्याओं के कारण तस्वीरें नहीं लगा पाई थी। इस पोस्ट में रानीबाग की कुछ तस्वीरें लगा रही हूं।


रानीबाग का मुख्य मन्दिर


 
जिया रानी की गुफा को जाने वाला रास्ता



जिया रानी की गुफा
 


 
जियारानी का मुख्य मन्दिर



नदी के किनारे लगे श्रृद्धालुओं की भीड़


जिया रानी का वो पत्थर जिसमें उनके घाघरे के निशान आज भी हैं


तट पर पूजा कराते श्रद्धालु


रानीबाग में लगी दुकानें

10 comments:

Ek ziddi dhun said...

तट पर पूजा करते श्रद्धालु...ये फोटो देखकर हंसी रुक नहीं रही है. आस्था का मसला है, इसलिए नो कमेन्ट

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

अच्छा लगा तस्वीरों के जरिए यह स्थान घूमना..
भारतीय संस्कृति बहुत समृद्ध है और हमें इस पर गर्व करना चाहिए..

हैपी ब्लॉगिंग

अजय कुमार झा said...

विनीता जी , बहुत ही सुंदर पोस्ट , तस्वीरों ने सुंदरता बढा दी है ,आभार
अजय कुमार झा

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर तस्वीरे, शुभकामनाएं.

रामराम.

डॉ. मनोज मिश्र said...

तस्वीरों के साथ रोचक जानकारी.

"अर्श" said...

sach kahun to maza aagayaa... :)



arsh

Creative Manch-क्रिएटिव मंच said...

सुन्दर है पोस्ट
सुन्दर हैं चित्र
सुन्दर है पूजा-पाठ
सुन्दर है उत्तरांचल
बहुत सुन्दर है भारत

लेकिन विनीता जी ये पीला कपडा ओढ़े दो लोग किस चीज की पूजा कर रहे हैं ?

विनीता यशस्वी said...

Creative Manch : Yah yagyopavit sanskar kar rahe hai...

मुनीश ( munish ) said...

Those who are not aware of this ritual depicting yellow cloth should know that this is how Gurus in ancient India gave 'deeksha' or 'guru-mantra' to shishyaas. It is symbolic of no-third party in between and there is nothing laughable at all.

मथुरा कलौनी said...

बहुत कुछ कह गईं ये तस्‍वीरें। आपने तो पूरी यात्रा करा दी।
धन्‍यवाद।